Thursday, May 12, 2022

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश

 

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश 

1- अनाक्जमेनीज ने सृष्टि के मूल कारण के रूप में स्वीकार किया है ?

  1. अग्नि 
  2. वायु 
  3. जल 
  4. मिट्टी 

2- सृष्टि की उत्पत्ति के सम्बन्ध में अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यता है ?

  1. प्रकृतिवादी एवं एकतत्त्ववादी 
  2. आत्मवादी एवं एकतत्त्ववादी 
  3. प्रकृतिवादी एवं बहुतत्त्ववादी 
  4. आत्मवादी एवं बहुतत्त्ववादी 

3- अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यताओं से किस सिद्धान्त के दर्शन होते है ?

  1. भूतजीवविज्ञान 
  2. आत्मजीवविज्ञान 
  3. परमात्मावाद 
  4. ईश्वरवाद 

4- अनाक्जमेनीज के अनुसार वायु तत्व की प्रमुख प्रक्रियायें है ?

  1. स्थिर और परिमित 
  2. गतिशील और अपरिमित 
  3. स्थिर और अपरिमित 
  4. गतिशील और परिमित 

5- अनाक्जमेनीज के अनुसार वायु तत्व की प्रमुख प्रक्रियायें हैं ?

  1. घनीकरण 
  2. विरलीकरण 
  3. 1 और 2 दोनों 
  4. इनमें से कोई नहीं 

6- अनाक्जमेनीज के दर्शन में वह प्रक्रिया जिसके द्वारा वायु तत्व सूक्ष्म रूप में परिवर्तित होकर अन्त में अग्नि का रूप धारण कर लेता है ?

  1.  विरलीकरण 
  2. घनीकरण
  3. 1 और 2 दोनों 
  4. इनमें से कोई नहीं 

7- अनाक्जमेनीज के अनुसार वायु तत्व का परिवर्तन मेघ रूप में होता है ?

  1. विरलीकरण द्वारा 
  2. सरलीकरण द्वारा 
  3. घनीकरण द्वारा 
  4. निम्नीकरण द्वारा 

8- सृष्टि के मूल कारण के रूप में वायु तत्त्व को स्वीकार करने के लिए अनाक्जमेनीज ने किन नियमों की सहायता ली है ?

  1. अनुभववादिता के नियमों की 
  2. बुद्धिवाद के नियमों की 
  3. 1 और 2 दोनों की 
  4. इनमें से कोई नहीं 

9- अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यतायें आधारित है ?

  1. वैज्ञानिक पद्धति पर 
  2. आगमन पद्धति पर 
  3. 1 और 2 दोनों पर 
  4. इनमें से कोई नहीं 
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Wednesday, May 11, 2022

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का दर्शन

 

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का दर्शन 

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का दर्शन 

        अनैक्सीमिनिज के अनुसार, "जगत् और स्वर्ग का मूल तत्व वायु , वाष्प या कुहासा है । वायु मनुष्य के लिए जीवनदायी तत्व है । वायु की विलुप्ति से मनुष्य सांस लेना बंद कर देगा और उसका अंत हो जाएगा । जिस प्रकार हमारी आत्मा , वायु होने के कारण , हमें एकसाथ रखती है , उसी प्रकार सांस और वायु पूरे विश्व में व्याप्त है । " अतः वायु जगत् का मूल तत्व है, जिससे अन्य सभी वस्तुओं की उत्पत्ति हुई है । उन्होंने थेलस के सिद्धान्त पर वापस लौटते हुए कहा कि ब्रहमांड का परम सिद्धान्त कोई एक वस्तु है । उन्होंने देखा कि जल वायु का संघिनित रूप होता है । इसलिए उनके अनुसार वायु से पृथ्वी, जल और अग्नि की उत्पत्ति हुई । संभवतः उनका विचार था कि तथापि पृथ्वी, वायु और अग्नि सभी जीवन की रचना के लिए आवश्यक है लेकिन सभी वस्तुओं का स्रोत वायु या वाष्प है । 

         वायु विरलीकरण के द्वारा अग्नि भी बन सकती है । वायु वह वस्तु है जो सभी चीजों को गति के लिए अनुप्राणित करती है । यह कोई पवित्र ओर शाश्वत वस्तु है । ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है, जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत अग्नि या न्यूमा ( Pneuma ) स्पन्दन कर रहा है और सभी चीजों को ब्रहमाडीय श्वांस से अनुप्राणित कर रही है । वायु से सभी चीजें विरलीकरण और संघनन की प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न होती है । संघनन और विश्लीकरण का यह सिद्धान्त ब्रहमांड में तत्वों के अविर्भाव की वैज्ञानिक व्याख्या का उन्नत रूप है ।

अनैक्सीमिनिज के प्रमुख कथन 

  • जल वायु का संघिनित रूप होता है ।
  • अग्नि वायु का विरलीकरण रूप होता है ।
  • वायु से पृथ्वी, जल और अग्नि की उत्पत्ति हुई ।
  • वायु जगत का मूल तत्व है जिससे सभी चीजें उत्पन्न हुई है । 
  • ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है, जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत अग्नि या न्यूमा ( Pneuma ) स्पन्दन कर रहा है । 

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अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां 

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां   

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes )

 दार्शनिक जीवन - 585 ई० पू० से  525 ई० पू० 

 प्रमुख दार्शनिक विचार - ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है , जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत अग्नि या न्यूमा ( Pneuma ) स्पन्दन कर रहा है और सभी चीजों को ब्रहमाडीय श्वांस से अनुप्राणित कर रही है ।

 प्रमुख उपाधि - भूतजीवविज्ञान ( Hylozoison ) आधारित दर्शन 

 प्रमुख कथन - वायु जगत् का मूल तत्व है , जिससे अन्य सभी वस्तुओं की उत्पत्ति हुई है । air is the source of all things. 

         

         अनैक्सीमिनिज ( 6 वीं शताब्दी ई.पू. ) मिलेसियन परम्परा के तीसरे दार्शनिक अनैक्सीमिनिज थे । वे अनैक्सीमेन्डर के शिष्य थे । अनैक्सीमिनिज ने वापस थेलस की चिंतन की पद्धति को अपनाया । उन्होंने कहा कि जगत् और स्वर्ग का मूल तत्व वायु, वाष्प या कुहासा है ।

        अनाक्जमेनीज का सम्बन्ध भी थेल्स की भाँति आयोनियन दर्शन से रहा है । इस प्रकार अनाक्जमेनीज ने भी थेल्स की भाँति सृष्टि की प्रकृतिवादी एवं एकतत्वादी व्याख्या की है । अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यताओं में हमे 'भूतजीववाद' ( Hylozoison ) के दर्शन होते हैं । अनाक्जमेनीज के अनुसार, वायु तत्त्व गतिशील और अपरिमित है । यह सभी दिशाओं में समान रूप में व्याप्त रहता है । अनाक्जमेनीज ने वायु तत्त्व की दो परस्पर विरोधी क्रियाओं को स्वीकार किया है । ये दो प्रक्रियाएँ हैं -

  1. संघननीकरण अथवा घनीकरण ( condensation ) 
  2. विरलीकरण ( Resrefaction ) 
विरलीकरण की प्रक्रिया द्वारा वायु तत्त्व सूक्ष्म रूप में परिवर्तित होकर अन्त में अग्नि का रूप धारण कर लेता है और तत्पश्चात् यह अग्नि कण, वायु के द्वारा ऊपर उठकर तारागणों में परिवर्तित हो जाता है । संघननीकरण के कारण वायु तत्त्व मेघ रूप में परिवर्तित हो जाता है और जब प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, तो वायु पहले जल का, तत्पश्चात् पृथ्वी का और अन्त में पत्थर का रूप धारण कर लेती है । अनाक्समेनीज ने पृथ्वी को पतली पाली के समान माना है जो कि चपटे आकार में उपलब्ध रहती है । 

        स्पष्ट है कि अनाक्जमेनीज ने वायु को विश्व के मूल रूप में स्वीकार करके अनुभववादिता नियमों की सहायता की है । अतः अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यताएँ वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है ।


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एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

1- एनेक्जागोरस के अनुसार सृष्टि का मूलतत्त्व है ?

  1. नाउस 
  2. फिलोस  
  3. 1 और 2 दोनों 
  4. इनमें से कोई नहीं 

2- एनेक्जागोरस के अनुसार सत् का स्वरूप है -

  1. नित्य और अविकारी 
  2. अनित्य और विकारी 
  3. नित्य और विकारी 
  4. अनित्य और अविकारी 

3- एनेक्जागोरस द्वारा स्वीकार्य नाउस का स्वरूप है ?

  1. जड़ 
  2. चेतन 
  3. 1 और 2 दोनों 
  4. इनमें से कोई नहीं 

4- एनेक्जागोरस के अनुसार 'नाउस' है ?

  1. परम विज्ञान 
  2. तर्कबुद्धि 
  3. विचार शक्ति 
  4. ये सभी 
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एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का दर्शन

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का दर्शन 

 

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का दर्शन 

          अनैक्सागोरस ने एम्पीडोकल्स की भांति पार्मेनाइड्स की पद्धति को अपनाते हुए यह माना कि "सत् स्थायी होता है" । इसका अर्थ है कि सत् से न तो सत् निकलता है और न ही असत्, बल्कि यह अपरिवर्तित रहता है । परन्तु अनैक्सागोरस एम्पीडोकल्स की इस दार्शनिक मान्यता से सहमत नहीं थे कि मूल तत्व अनेक हैं, जैसे - पृथ्वी, वायु, अग्नि और जल । उनके अनुसार, प्रत्येक विभाज्य वस्तु, जो गुणात्मक रूप से पूर्ण के समान हैं, वह परम और अव्युत्पन्न है । उदाहरण के लिए, चांदी के एक टुकड़े को दो भागों में बाट दिया जाये तो दूसरे टुकड़े में भी पहले टुकड़े के गुण होंगे । यहां भाग भी पूर्ण के समान होगा । वे वस्तुएं, जिनके भाग किए जाने पर उनके गुण भी वही होते हैं जो पूर्ण के होते हैं, परम और अव्युत्पन्न होते हैं । ये वस्तुएं अनेक गुणात्मक रूप से भिन्न कणों का मिश्रण होती हैं । अनैक्सागोरस के अनुसार कोई कण अकेला नहीं होता है बल्कि सभी प्रकार के कण एक साथ होते हैं और ये अविभाज्य होते हैं । लेकिन वास्तव में कुछ कण प्रभावी होते हैं एवं उन्हीं प्रभावी कणों के गुणों के आधार पर कोई वस्तु सोना और कोई चांदी बनती है । उन्होंने आगे कहा "प्रत्येक दूसरी वस्तु में प्रत्येक वस्तु का भाग होता है ।" 
इस प्रकार अनैक्सागोरस ने परिवर्तन और स्थायित्व की अवधारणा को समझाने का प्रयास किया । यदि हम उन्हें सही माने तो यह समझाना आसान है कि मांस वनस्पति से आ सकता है और वनस्पति मांस से । अर्थात एक प्रकृति की वस्तुओं से पूर्णरूप से भिन्न प्रकृति की कोई भी वस्तु उत्पन्न हो सकती है । 

प्रयोजनवाद 

         प्रयोजनवाद का विचार सर्वप्रथम अनैक्सागोरस के दर्शन में देखने को मिलता है । उन्होंने बढ़ी कुशलता से इसका विश्व व्यवस्था की विशिष्टता और पूर्णता के साथ संबन्ध स्थापित किया । उन्होंने जगत् की समस्त जटिल प्रक्रिया, जैसी यह वर्तमान में दिखाई देती है, को अनिवार्य मूल परिवर्तन चक्र से उत्पन्न लम्बी परिवर्तनों की श्रृंखलाओं का परिणाम माना । आरंभिक गति के लिए उन्होंने एक बौद्धिक सिद्धान्त 'बुद्धि' ( Nous ) को कारक के रूप में प्रस्तुत किया । नाउस एक स्वायत्त सक्रिय सत् है, जो जगत् में समस्त गति और जीवन का मुक्त स्रोत है । नाउस या बुद्धि अनैक्सागोस का दर्शनशास्त्र को एक विशेष योगदान है । नाउस उन सभी छोटी और बड़ी चीजों पर नियंत्रण करता है, जिनमें जीवन है । यह समस्त चक्रण का नियंत्रण कर रहा है और इसने शुरूआत में ही परिक्रमा आरंभ कर दी थी । नाउस एक प्रयोजनवादी या उद्देश्यपरक सिद्धान्त है । 

नैतिक सिद्धान्त 

        अनैक्सींगोरस की कोई औपचारिक नैतिक शिक्षाएं नहीं थी, लेकिन उन्होंने यूनानी दार्शनिक अध्ययनों में बुद्धि या नाउस की अवधारणा प्रस्तुत की । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "बुद्धि अनन्त और स्वचालित है और इसमें कुछ भी मिश्रित नहीं है , बल्कि यह स्वयंभू है ।

       अरस्तू ने अनैक्सागोरस की उनके विचारों की सौम्यता के लिए सराहना की, लेकिन ब्रहमांडीय घटनाओं को समझाने में संगत रूप से नाउस का उपयोग नहीं कर पाने के कारण उनकी आलोचना भी की । यह संभव है कि अनैक्सागोरस की नाउस की अवधारणा ने मानव आचरण के मानसिक पहलुओं की चर्चा करने में अरस्तू की सहायता की हो । कभी - कभी अनैक्सागोरस ने बुद्धि को सभी वस्तुओं में सबसे जटिल तथा रहस्मयी कहा है । इस प्रकार वह इसे एक प्रकार का तत्व घोषित करते प्रतीत होते हैं । नाउस को रचनात्मक तत्व के रूप में नहीं मानना चाहिए । परन्तु यह सर्वव्यापी और परात्पर है । नाउस सभी सजीवों में पाया जाता है । सजीवों के भौतिक शरीरों में अनिवार्य रूप से अन्तर होते हैं , लेकिन उनकी आत्माओं में कोई अन्तर नहीं होता । यद्यपि , अनैक्सागोरस ने मानव चेतना में स्वतंत्र स्वः होने को स्वीकार नहीं किया । उनके नाउस के सिद्धान्त को लेकर एक उलझन विद्यमान है कि यह ईश्वरवादी है या सर्वेश्वरवादी है । अरस्तू ने यह कहते हुए उनकी आलोचना की है कि "अनैक्सागोरस केवल तब-तब 'नाउस' को लेकर आते हैं जब जब वह सत् की यान्त्रिक व्याख्या करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं" ।

एनेक्जागोरस के दर्शन पर आधारित महत्वपूर्ण कथन 

  • सत् स्थाई होता है । 
  • नाउस परम विज्ञान है । 
  • प्रत्येक दूसरी वस्तु में प्रत्येक वस्तु का भाग होता है ।
  • नाउस उन सभी छोटी और बड़ी चीजों पर नियंत्रण करता है, जिनमें जीवन है ।
  • बुद्धि अनन्त और स्वचालित है और इसमें कुछ भी मिश्रित नहीं है, बल्कि यह स्वयंभू है ।

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एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि 

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि 

दार्शनिक जीवन - 500 ई० पू० से 428 ई० पू०  

प्रमुख दार्शनिक विचार - " बुद्धि ( Nous ) सभी चीजों पर नियन्त्रण करता है"। Nous, or Mind ordering all things. 

प्रमुख उपाधि - नाउस की अवधारणा प्रस्तुत की 

प्रमुख कथन - "बुद्धि ( Nous ) अनन्त और स्वचालित है और इसमें कुछ भी मिश्रित नहीं, बल्कि यह स्वयंभू है"

           अनैक्सागोरस का जन्म एशिया माइनर में क्लेजोमेनी में हुआ था । वे वहां से अपने घर परिवार के साथ एथेन्स आ गए और महान राजनेता पेरीकल्स के मित्र बन गए, जिनका लक्ष्य अपने शहर को हेल्लास का बौद्धिक और राजनीतिक केन्द्र बनाना था । 

       एनेक्जागोरस 5 वीं शती ई० पू० एनेक्जागोरस सत् को नित्य अविकारी और उत्पत्ति-विनाश रहित मानने में पार्मेनाइडीज और एम्पेडोक्लीज से सहमत थे। उत्पत्ति को संयोग और विनाश को वियोग मानने में वे एम्पेडोक्लीज से सहमत थे किन्तु एनेक्जागोरस के अनुसार, एम्पेडोक्लीज के चार महाभूत मौलिक तत्त्व नहीं हैं, ये भी मौलिक तत्त्वों के संयोग से बने हैं। इनको एजेक्जागोरस ने बीज ( Seeds ) कहा है । ये 'बीज' अपने मौलिक रूप से विश्वभर में व्याप्त हैं । इनमें सहसा बैग से गति उत्पन्न हुई जिसके कारण समान 'बीज' परस्पर आकर्षित होकर एक-दूसरे से मिलते चले गए और इस प्रकार इस सृष्टि का निर्माण हुआ, किन्तु समस्या यह थी कि यह गति कैसे उत्पन्न हुई । इस समस्या का समाधान करने में एनेक्जागोरस को सहसा एक ऐसी सुन्दर कल्पना सूझी जिसके कारण ग्रीक दर्शन में अब तक उनको प्रतिष्ठित स्थान मिला हुआ है । 

         एनेक्जेगोरस ने यह स्पष्ट स्वीकार किया कि गति जड़ बीजों में स्वतः उत्पन्न नहीं हो सकती । गति का कारण चेतन तत्त्व ही हो सकता है जो शक्तिमान है । इस युक्त तत्त्व को एनेक्जागोरस ने ‘परम विज्ञान' का नाम दिया । यह 'परम विज्ञान' समस्त विश्व का अधिष्ठाता है और बीजों में गति उत्पन्न करने का कारण है । यह विकासदर्शी है और समस्त जीवन का मूल स्रोत है । यह बीजों का भी 'बीज' है और विश्व में सामंजस्य और एकरूपता उत्पन्न करता है ।

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थेल्स ( Thales ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

थेल्स ( Thales ) के दर्शन पर आधारित प्रश्न 

थेल्स ( Thales ) के दर्शन पर आधारित प्रश्न 

1- इनमें से किसे ज्यामिति का जनक कहा जाता है ?

  1. थेल्स 
  2. एनेक्जागोरस 
  3. अनाक्जमेनीज 
  4. पाइथागोरस 

2- थेल्स के अनुसार सृष्टि का मूल तत्व है ?

  1. जल 
  2. वायु 
  3. अग्नि 
  4. तर्कबुद्धि 

3- थेल्स की सृष्टि संकल्पना आधारित है ?

  1. कार्यकारणवाद पर 
  2. स्वभाववाद पर 
  3. 1 और 2 दोनों 
  4. इनमें से कोई नहीं 

4- थेल्स के अनुसार पृथ्वी की आकृति है ?

  1. वृत्ताकार 
  2. गुम्बदाकार 
  3. परवलयकार 
  4. इनमें से कोई नहीं 

5- थेल्स के अनुसार पृथ्वी की स्थिति है -

  1. ब्रह्माण्ड के ऊपर 
  2. ब्रह्माण्ड के नीचे 
  3. ब्रह्माण्ड के मध्य 
  4. इनमें से कोई नहीं 

6- थेल्स की दार्शनिक व्याख्या का आधार है -

  1. अध्यात्मवाद 
  2. बुद्धिवाद 
  3. स्वभाववाद 
  4. प्रकृतिवाद 

7- थेल्स ने चुम्बकत्व के गुण के आधार पर किसे सिद्ध करने का प्रयास किया है ?

  1. एकात्मवाद को 
  2. सर्वात्मवाद को 
  3. 1 और 2 दोनों को 
  4. इनमें से कोई नहीं 

8- "सभी वस्तुओं में देवता भरे हुए है" यह प्रसिद्ध कथन किसका है ?

  1. एनेक्जागोरस का  
  2. अनाक्जमेनीज का 
  3. थेल्स का 
  4. पाइथागोरस का 

9- सृष्टि उत्पत्ति के सम्बन्ध में थेल्स की मान्यता है ?

  1. एकतत्त्ववादी 
  2. बहुतत्त्ववादी 
  3. 1 और 2 दोनों 
  4. इनमें से कोई नहीं 

10- सृष्टि उत्पत्ति के सम्बन्ध में थेल्स ने इनमें से किसे स्वीकार नहीं किया है ?

  1. मानव अस्तित्व को 
  2. परलौकिक सत्ता को 
  3. 1 और 2 दोनों को 
  4. इनमें से कोई नहीं 

11- निम्नलिखित में से कौन 'चुम्बक' की तरह की निर्जीव वस्तुओं में भी आत्मा का अभिधान करता है ?

  1. थेल्स 
  2. एनेक्जीमेन्डर 
  3. जेनोफेनीज 
  4. एम्पेडोक्लीज 
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