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पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  1- इलियाई सम्प्रदाय को एक व्यवस्थित विचारधारा के रूप में स्थापित करने का श्रेय किसे है ? पाइथागोरस को  पार्मेनाइडीज को  हेराक्लिटस को  डेमोक्रेटस को  2- पार्मेनाइडीज के अनुसार सत् का बोध किसके द्वारा होता है ? अन्तर्भान  बुद्धि  आत्मा  समाधि  3- पार्मेनाइडीज का 'सत् का सिद्धान्त' किस दार्शनिक के प्रत्यय सिद्धान्त से अनुप्रेरित था ? प्लेटों  हीगल  बर्कले  इनमें से कोई नहीं  4- पार्मेनाइडीज के आलोक में दिए गाए अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए और सही कूट को चिन्हित कीजिए -  अभिकथन (A) - रिक्तता सम्भव नहीं ।  तर्क (R) - रिक्त स्थान असत् होगा, इसलिए इसका अस्तित्व नहीं है ।  कूट    A और R दोनों सही है तथा R, A की सही व्याख्या है । A और R दोनों सही है तथा R, A की सही व्याख्या नहीं है ।  A सही है किन्तु R गलत है ।  A गलत है किन्तु R सही है ।  5-...

पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का दर्शन

पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का दर्शन  पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का दर्शन   'सत्' की अवधारणा           पार्मेनाइड्स ने हेरेक्लीटस के सम्भवन ( गति ) के विरोध में 'सत्' की अवधारणा को विकसित किया । पार्मेनाइड्स के अनुसार सत् अविनाशक, पूर्ण और ज्ञेय है । उन्होंने 'सत्' को भौतिक माना । उनका सोचना था कि 'सत्' सीमित है, क्योंकि वह एक है । 'सत्' अन्नत भी है, अर्थात इसका न तो उद्गम है और न ही अंत, लेकिन यह देशीय रूप में सीमित है ।           वे पाइथागोरस के अमूर्त सार की अवधारणा के विषय में विभिन्न मत रखते थे । पाइथागोरस के लिए सत् ज्यामितीय इकाईयां है और प्रत्येक वस्तु को इन इकाईयों जैसे बिंदु, रेखा, त्रिकोण, वृत्त, घन आदि, जो की अमूर्त हैं, के रूप में समझा ज सकता है । पाइथागोरस का कहना है कि 'अस्तित्व’ की सुरक्षा की जानी चाहिए, अस्तित्व को तार्किक घटकों में प्राप्त नहीं किया जा सकता है । अस्तित्व विचार से पहले है । गणित और ज्यामिति से पहले 'सत्' का दर्शन या तत्वमीमांसा का अस्तित्व होता है जिस पर विचार निर्भर करता है, न ...

पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

  पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां  पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां  दार्शनिक जीवन - 540 ई० पू० से 480 ई० पू०  प्रमुख दार्शनिक विचार - "तत्व सत् है परिणाम या गति नहीं"  प्रमुख उपाधि - यूरोपीय विज्ञान का संस्थापक  प्रमुख कथन - तत्व शुद्ध सत्ता (Pure Being) है । वह एक, अद्वितीय, नित्य, अपरिणामी, अविनाशी और कूटस्थ है ।           पार्मेनाइड्स यूनानी दर्शन के एलियाई परम्परा के दार्शनिक थे । उन्होंने ही 'सम्भवन' ( गति ) की अवधारणा के विरोध में 'सत्' ( स्थिति ) की अवधारणा को विकसित किया । इनका समय ईसा पूर्व पाँचवी शताब्दी रहा है । प्लेटों के अनुसार, जब एथेन्स में इनका वार्तालाप सॉक्रेटीज से हुआ तब इनकी अवस्था 65 वर्ष की थी । पार्मेनाइड्स ने एक कविता में अपनी दार्शनिक कृति लिखी है जिसमें ये स्वर्ग पहुँचते है और वहाँ एक देवी इनको सत्य का दर्शन करती है।       पार्मेनाइड्स का दर्शन हेरेक्लिाइटस के क्षणिकवाद के खण्डन...