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प्रोटागोरस ( Protagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रोटागोरस ( Protagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  प्रोटागोरस ( Protagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  1- "मनुष्य प्रत्येक वस्तु का मानदण्ड है" यह कथन किसका है ? डेमोक्रेटस  पाइथागोरस  प्रोटोगोरस  जॉर्जियास  2- इनमें से किस दार्शनिक ने सत्य की व्याख्या व्यक्ति सापेक्ष के रूप में की है ? प्रोटोगोरस  डेमोक्रेटस  हेराक्लेटस  जॉर्जियास  3- प्रोटोगोरस के अनुसार सद्गुण और सुख - परस्पर अभिन्न नहीं है   परस्पर भिन्न है   भिन्न और अभिन्न दोनों है   इनमें से कोई नहीं  4- प्रोटोगोरस के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही है ? सही कूट का चयन कीजिए -  मनुष्य सभी वस्तुओं का मानदंड है ।  सत्य वस्तुनिष्ठ है ।  एक व्यक्ति के लिए जो सत्य है यह आवश्यक नहीं कि दुसरें के लिए भी सत्य हो ।  कूट  केवल 1  1 और 2  1 और 3  2 और 3  ------------

प्रोटागोरस ( Protagoras ) का दर्शन

प्रोटागोरस की ज्ञानमीमांसा         प्रोटागोरस को सबसे अधिक अपने इस कथन के लिए जाना जाता है कि "मानव सभी बातों का मापदंड है , जो है वह वास्तविक है और जो नहीं है वह वास्तविक नहीं है ।" यहाँ पर ' मनुष्य ' और ' वस्तु ' शब्द के अर्थ अत्यन्त विवाद के विषय है । प्लेटो की थिएटेटस में प्रोटागोरस के उपर्युक्त कथन की बोध की अनुभूति के संदर्भ में वैयक्तिक बोध के रूप में व्याख्या की गई है । जब कहीं पवन बहती है तो उससे किसी को ठंडा लग सकती है और किसी को नहीं । सुकरात के अनुसार क्या हमें प्रोटागोरस से सहमत होना चाहिए कि पवन उसके लिए ठंडी है जिसे सर्दी लग रही है और उसके लिए नहीं है, जिसे सर्दी नहीं लग रही है । इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रोटागोरस के कथन को व्यक्तिगत मनुष्य के अर्थ में लेना चाहिए , विशिष्ट मनुष्य के रूप में नहीं । यही नहीं , ध्यान इस बात पर भी दिया जाना चाहिए कि सोफिस्टों का अर्थ यह नहीं था कि पवन ठंडी प्रतीत होती है , बल्कि यह था कि वह एक व्यक्ति के बोध की अनुभूति के लिए ठंडी हो सकती है , जबकि दूसरे के लिए नहीं भी हो सकती है । प्रोटागोरस का नीतिशास्त्र ...

प्रोटागोरस ( Protagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

  प्रोटागोरस ( Protagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां  प्रोटागोरस ( Protagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां  दार्शनिक जीवन - 481 ई० पू० से 411 ई० पू०  प्रमुख दार्शनिक विचार - "मानव सब पदार्थों का मानदण्ड है"  प्रमुख उपाधि - उपयोगितावाद के जन्मदाता  प्रमुख कथन - एक व्यक्ति के लिए जो सत्य है यह आवश्यक नहीं कि वह दूसरे के लिए भी सत्य हो अतः  सत्य व्यक्तिनिष्ठ होता है ।      प्रोटागोरस का जन्म लगभग 481 ई. पू. में थ्रेस के एन्डेरा में हुआ था । ऐसा माना जाता है कि वे शताब्दी के मध्य में किसी समय एथेन्स आए थे । पेरीकल्स ने उन्हें 444 ई. पू. में स्थापित किये गए थूरियो के उपनिवेश के संविधान को बनाने का काम सौंपा । वह 431 में और 430 के प्लेग के दौरान एथेन्स वापस चले आए । प्लेग के कारण पेरीकल्स के दो पुत्रों की मृत्यू हो गयी । ऐसा कहा जाता है कि प्रोटागोरस पर ईश्वर पर लिखी उनकी अपनी पुस्तक के कारण ईशनिन्दा का आरोप लगाया गया, परन्तु वे मुकदमें से पहले ही देश छोड़ कर भाग गए तथा सिसली को जा...