 |
| अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां |
अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां
अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes )
|
दार्शनिक जीवन - 585 ई० पू० से 525 ई० पू०
|
|
प्रमुख दार्शनिक विचार - ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है , जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत अग्नि या न्यूमा ( Pneuma ) स्पन्दन कर रहा है और सभी चीजों को ब्रहमाडीय श्वांस से अनुप्राणित कर रही है ।
|
|
प्रमुख उपाधि - भूतजीवविज्ञान ( Hylozoison ) आधारित दर्शन
|
|
प्रमुख कथन - वायु जगत् का मूल तत्व है , जिससे अन्य सभी वस्तुओं की उत्पत्ति हुई है । air is the source of all things.
|
अनैक्सीमिनिज ( 6 वीं शताब्दी ई.पू. ) मिलेसियन परम्परा के तीसरे दार्शनिक अनैक्सीमिनिज थे । वे अनैक्सीमेन्डर के शिष्य थे । अनैक्सीमिनिज ने वापस थेलस की चिंतन की पद्धति को अपनाया । उन्होंने कहा कि जगत् और स्वर्ग का मूल तत्व वायु, वाष्प या कुहासा है ।
अनाक्जमेनीज का सम्बन्ध भी थेल्स की भाँति आयोनियन दर्शन से रहा है । इस प्रकार अनाक्जमेनीज ने भी थेल्स की भाँति सृष्टि की प्रकृतिवादी एवं एकतत्वादी व्याख्या की है । अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यताओं में हमे 'भूतजीववाद' ( Hylozoison ) के दर्शन होते हैं । अनाक्जमेनीज के अनुसार, वायु तत्त्व गतिशील और अपरिमित है । यह सभी दिशाओं में समान रूप में व्याप्त रहता है । अनाक्जमेनीज ने वायु तत्त्व की दो परस्पर विरोधी क्रियाओं को स्वीकार किया है । ये दो प्रक्रियाएँ हैं -
- संघननीकरण अथवा घनीकरण ( condensation )
- विरलीकरण ( Resrefaction )
विरलीकरण की प्रक्रिया द्वारा वायु तत्त्व सूक्ष्म रूप में परिवर्तित होकर अन्त में अग्नि का रूप धारण कर लेता है और तत्पश्चात् यह अग्नि कण, वायु के द्वारा ऊपर उठकर तारागणों में परिवर्तित हो जाता है । संघननीकरण के कारण वायु तत्त्व मेघ रूप में परिवर्तित हो जाता है और जब प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, तो वायु पहले जल का, तत्पश्चात् पृथ्वी का और अन्त में पत्थर का रूप धारण कर लेती है । अनाक्समेनीज ने पृथ्वी को पतली पाली के समान माना है जो कि चपटे आकार में उपलब्ध रहती है ।
स्पष्ट है कि अनाक्जमेनीज ने वायु को विश्व के मूल रूप में स्वीकार करके अनुभववादिता नियमों की सहायता की है । अतः अनाक्जमेनीज की दार्शनिक मान्यताएँ वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है ।
------------