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अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का दर्शन

 

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का दर्शन 

अनैक्सीमिनिज ( Anaximenes ) का दर्शन 

        अनैक्सीमिनिज के अनुसार, "जगत् और स्वर्ग का मूल तत्व वायु , वाष्प या कुहासा है । वायु मनुष्य के लिए जीवनदायी तत्व है । वायु की विलुप्ति से मनुष्य सांस लेना बंद कर देगा और उसका अंत हो जाएगा । जिस प्रकार हमारी आत्मा , वायु होने के कारण , हमें एकसाथ रखती है , उसी प्रकार सांस और वायु पूरे विश्व में व्याप्त है । " अतः वायु जगत् का मूल तत्व है, जिससे अन्य सभी वस्तुओं की उत्पत्ति हुई है । उन्होंने थेलस के सिद्धान्त पर वापस लौटते हुए कहा कि ब्रहमांड का परम सिद्धान्त कोई एक वस्तु है । उन्होंने देखा कि जल वायु का संघिनित रूप होता है । इसलिए उनके अनुसार वायु से पृथ्वी, जल और अग्नि की उत्पत्ति हुई । संभवतः उनका विचार था कि तथापि पृथ्वी, वायु और अग्नि सभी जीवन की रचना के लिए आवश्यक है लेकिन सभी वस्तुओं का स्रोत वायु या वाष्प है । 

         वायु विरलीकरण के द्वारा अग्नि भी बन सकती है । वायु वह वस्तु है जो सभी चीजों को गति के लिए अनुप्राणित करती है । यह कोई पवित्र ओर शाश्वत वस्तु है । ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है, जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत अग्नि या न्यूमा ( Pneuma ) स्पन्दन कर रहा है और सभी चीजों को ब्रहमाडीय श्वांस से अनुप्राणित कर रही है । वायु से सभी चीजें विरलीकरण और संघनन की प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न होती है । संघनन और विश्लीकरण का यह सिद्धान्त ब्रहमांड में तत्वों के अविर्भाव की वैज्ञानिक व्याख्या का उन्नत रूप है ।

अनैक्सीमिनिज के प्रमुख कथन 

  • जल वायु का संघिनित रूप होता है ।
  • अग्नि वायु का विरलीकरण रूप होता है ।
  • वायु से पृथ्वी, जल और अग्नि की उत्पत्ति हुई ।
  • वायु जगत का मूल तत्व है जिससे सभी चीजें उत्पन्न हुई है । 
  • ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है, जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत अग्नि या न्यूमा ( Pneuma ) स्पन्दन कर रहा है । 

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