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हेराक्लाइटस ( Heraclitus ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  1- 'सम्भूति का सिद्धान्त' का प्रतिपादन किसके द्वारा किया गया ? पाइथागोरस के द्वारा  डेमोक्रेट्स के द्वारा  हेराक्लेट्स के द्वारा  इनमें से कोई नहीं  2- हेराक्लेट्स के अनुसार समस्त परिवर्तन का आधार क्या है ? बुद्धि  अग्नि  द्रव्य  वायु  3- हेराक्लेट्स की दार्शनिक मान्यताएं किस पर आधारित थी ? बुद्धिवाद पर  सापेक्षतावाद पर  1 और 2 दोनों पर  इनमें से कोई नहीं  4- हेराक्लेट्स के अनुसार एक भौतिक तत्व का दूसरे में परिवर्तन होता है  निषेध के द्वारा  समन्वय के द्वारा  सामंजस्य के द्वारा  बुद्धि के द्वारा  5- हेराक्लेट्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही कूट का चयन कीजिए - ब्रह्माण्ड का मूल द्रव्य अग्नि है ।  सत् निरंतर परिवर्तनशील है ।  सत् अपरिवर्तनशील है ।  कूट  केवल 1  केवल 2  1 और 3  1 और 2  6-...

हेराक्लाइटस ( Heraclitus ) का दर्शन

हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) का दर्शन  हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) का दर्शन  निरंतर प्रवाह         हेरक्लाइटस को उनकी इस ब्रहमांडीय दर्शन की उक्ति के लिए जाना जाता है कि सभी चीजें निरंतर गतिशील या परिवर्तनीय हैं । यह प्रकृति का सबसे मौलिक सिद्धान्त है । उन्होंने प्रकृति की अनुभूति को महत्व दिया । उन्होंने कहा कि नदी के समान प्रत्येक वस्तु प्रवाहमान है । वह कहते है कि कोई भी व्यक्ति एक ही नदी में दो बार प्रवेश नहीं कर सकता हैं और न ही कोई व्यक्ति समान अवस्था में समान नश्वर पदार्थ को दो बार स्पर्श कर सकता हैं"। जब कोई व्यक्ति नदी में दूसरी बार उतरता है, तो न तो वह व्यक्ति स्वयं और न ही नदी समान होती है । व्यक्ति पहले ही परिवर्तित हो चुका होता है, क्योंकि व्यक्ति के शरीर की कोशिकाएं नई बनी होती है । व्यक्ति पहले से ही सम्भवन की प्रक्रिया में होता है और नदी में जल निरंतर प्रवाहित होता रहता है, क्योंकि प्रवाहीत जल ही नदी को नदी बनाता है । अतः जहां व्यक्ति उसमें प्रवेश करता है वह उसी क्षण बदल जाती है । चूंकि उनकी संपूर्ण दार्शनिक अवधारणा सत् के परिव...

हेराक्लाइटस ( Heraclitus ) का जीवन-परिचय एवं उपलब्धियां

  हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) का जीवन-परिचय एवं उपलब्धियां  हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) का जीवन-परिचय एवं उपलब्धियां  दार्शनिक जीवन -  536 ई० पू० से - 470  ई० पू०  प्रमुख दार्शनिक विचार - "सृष्टि का मूल तत्व अग्नि या तेजस्तत्व है"    प्रमुख उपाधि - विपरीत सम्भूति का सिद्धान्त   प्रमुख कथन - "मेरा दर्शन इने-गिने सुयोग्य व्यक्तियों के लिए ही है, क्योंकि गधों को घास चाहिए, स्वर्ण नहीं"          हेराक्लाइटस का जन्म ईफेसस में हुआ था, वे एक संभ्रात परिवार के पुत्र थे और ईसा से पूर्व छठी शताब्दी के अन्त और पाँचवी शताब्दी के आरम्भ में पैदा हुए थे । इनका जन्म भगवान बुद्ध के अन्तिम दिनों में हुआ था । ये राजकुल में पैदा हुए और अपने छोटे भाई को उत्ताधिकारी घोषित कर विरक्त हो गए थे । इन्होंने प्रजातन्त्र का सदैव पूरजोर ढंग से विरोध किया । उनके लेखन के लगभग सौ अंश मौजूद हैं । इनमें अधिकतर ब्रहमाण्ड एवं आत्मा से सम्बंधित सूक्तियां और पहेलियां हैं ।      ...