अरस्तू ( Aristotle ) का दर्शन अरस्तू ( Aristotle ) का दर्शन तर्क शास्त्र अरस्तू तर्क शास्त्र के क्षेत्र के वास्तविक अन्वेषक थे । आज भी उनके तर्क शास्त्र का अनुसरण किया जाता है । अरस्तू के अनुसार तर्क शास्त्र सही चिंतन की कला है और इसलिए इससे सत्य की प्राप्ति होती है । तर्कशास्त्र की अन्य विषयों की भांति कोई विशेष विषयवस्तु नहीं होती है, लेकिन यह अन्य विषयों के लिए एक साधन तथा यंत्र की भांति कार्य करता है । व्यवस्थापन अरस्तू ने तर्कशास्त्र के व्यवस्थापन पर काफी काम किया । वे इस तथ्य पर ध्यान देने वाले पहले व्यक्ति थे कि मस्तिष्क की एक निश्चित मूल संरचना और विधि होती है और उन्होंने वह ( मस्तिष्क ) क्या है और कैसे कार्य करता है, इसे बताने का प्रयास किया । उनके अनुसार मस्तिष्क के कार्य करने के तीन मूल घटक होते हैं अवधारणा, निर्णय और तर्क । अरस्तू के अनुसार अवधारणा वह है, जिसमें आधार वाक्य यानि निर्धारक और वह जिसका यह निर्धारण करता है दोनों का संकल्प होता है । उन्होंन...
अरस्तू ( Aristotle ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां अरस्तू ( Aristotle ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां दार्शनिक जीवन - 384 ई० पू० से 322 ई० पू० प्रमुख दार्शनिक विचार - "समान के साथ समान व्यवहार और असमान के साथ असमान व्यवहार करना चाहिए" प्रमुख उपाधि - तर्कशास्त्र का जनक प्रमुख कथन - "आकार वस्तुओं से पृथक नहीं बल्कि उनमें अंतर्निष्ठ है, वे इंद्रियातीत नहीं बल्कि अनुस्यूत है" अरस्तू ( Aristotle ) का जन्म थ्रेस के स्टेगिरा नामक नगर में हुआ था । उनके पिता मेसीडोन-नरेश के राजवैद्य थे । 17 वर्ष की आयु में एरिस्टॉटल विद्या ध्ययन के लिये एथेन्स स्थित प्लेटो की 'एकेडमी' में भर्ती हुए और बीस वर्ष तक, प्लेटो का देहान्त होने तक, वे अपने गुरु प्लेटो के साक्षात् सम्पर्क में रहे । बाद में उन्होंने एकेडमी छोड़ दी और अपने स्वतंत्र विचारों के विकास में लग गये । एसोस नगर में जाकर वे हरमियस के सम्पर्क में आये और उनकी भतीजी पाइथियस से विवाह कर लिया । मेसीडोन-नरेश फिलिप के राजकुमार एलेक्जान्डर (...