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पाइथागोरस ( Pythagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

पाइथागोरस ( Pythagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  1- इनमें से किसने आत्मा के आवागमन सिद्धान्त को स्वीकार किया है ? थेल्स  एनेक्जागोरस  अनाक्जमेनीज  पाइथागोरस  2- इनमें से किसने संख्या को सृष्टि की उत्पत्ति का मूल आधार माना है ? पाइथागोरस  थेल्स  हेराक्लिट्स इनमें से कोई नहीं  3- पाइथागोरस के अनुयायियों के अनुसार विश्व का केन्द्र है - पृथ्वी  सूर्य  अग्नि  जल  4- "शरीर आत्मा का बंदीगृह है" - यह कथन किसका है ? पार्मेनाइडीज  पाइथागोरस   हेराक्लिट्स  थेल्स  5- पाइथागोरस के दर्शन के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सुसंगत नहीं है ? आत्मा का आवगम सिद्धान्त चिरस्थाई है ।  सम एवं विषम क्रमशः असीमित एवं सीमित से सम्बन्धित है ।  शरीर पूर्णजन्म का बंदीगृह है ।  मानव आत्मा एक दैवी सम्पदा है ।  6- निम्नलिखित में से किसका विचार है कि 'पदार्थ, पदार्थ है क्योंकि उनकी गणना की जा सकती है' - पाइथागोरस    एनेक्जागोरस  एम्पेडोक्लीज  डेमोक्रेट्स  7- निम्नलिखित कथनों पर पाइथागो...

पाइथागोरस ( Pythagoras ) का दर्शन

पाइथागोरस ( Pythagoras ) का दर्शन  पाइथागोरस ( Pythagoras ) का दर्शन  नैतिक संस्था       पाइथागोरस के समय के समाज में धार्मिक पुनरुद्धार की प्रबल भावना थी । अतः उनसे वास्तविक धार्मिक शिक्षाएं प्रदान करने की शुरूआत हुई । पाइथागोरस ने नैतिक, धार्मिक और राजनैतिक उद्देश्य के लिए एक संस्था की स्थापना की । उनका उद्देश्य अपने अनुयायियों के बीच राजनैतिक सद्गुणों को विकसित करना था, जिससे उन्हें राष्ट्र की भलाई की शिक्षा दी जा सके और वे अच्छी प्रजा बन सके । इसके लिये व्यक्ति को स्वयं पर नियंत्रण रखना, अपने मनोविकारों का दमन करना, अपनी आत्मा के साथ सामंजस्य करना सीखना चाहिए । उसके मन में अपने बड़ों, शिक्षकों और राष्ट्र के लिए सम्मान होना चाहिए । इसी कारण यह धारण बनी कि पाइथागोरियन मात्र एक राजनैतिक समुदाय था । लेकिन पाइथागोरियन अनिवार्य रूप से राजनैतिक नहीं बल्कि धार्मिक या नैतिक थे । उनकी शिक्षा का मुख्य अभिप्राय उन धार्मिक-सन्यासी विचारों से था जो शुद्ध और शुद्धता पर आधारित थे ।  आत्म विचार       पाइथागोरसवादियों ने मानव-आत्मा को प्राण आत्मा के उ...

पाइथागोरस ( Pythagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

  पाइथागोरस ( Pythagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां  पाइथागोरस ( Pythagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां  दार्शनिक जीवन -  580 ई.पू. से 497 ई.पू. प्रमुख दार्शनिक विचार -  संख्या सभी वस्तुओं का आधार है और ब्रहमांड का सिद्धान्त है । प्रमुख उपाधि - संख्या का जनक   प्रमुख कथन -  सभी वस्तुओं का मूल तत्व संख्या है ।          आयोनी दर्शन पाइथागोरस के कार्य द्वारा दक्षिण इटली में पहुंचा । सामोस के पाइथागोरस, पाइथोगोरसीय दार्शनिक परम्परा के संस्थापक थे । उनका जन्म सामोस में 580 और 570 ई.पू. के बीच हुआ था । वह वर्ष 529 ई.पू. के आसपास दक्षिण इटली में यूनानी कोलोनी में चले गए थे । एम्ब्लीकस मानते थे कि पाइथागोरस दिव्य दर्शन शास्त्र के जनक और मार्ग दर्शक थे । वी. कापेरेली ने लिखा है कि ‘पाइथागोरस का दर्शन, ज्ञान के साथ प्रबल धार्मिक भावना का मिश्रण है’ । अनैक्सीमिनिज के दर्शन पर उनकी निर्भरता स्पष्ट । वे मानते हैं कि ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है, जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत् अग्नि...