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| पाइथागोरस ( Pythagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां |
पाइथागोरस ( Pythagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां
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दार्शनिक जीवन - |
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प्रमुख दार्शनिक विचार - |
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प्रमुख उपाधि - संख्या का जनक |
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प्रमुख कथन - |
आयोनी दर्शन पाइथागोरस के कार्य द्वारा दक्षिण इटली में पहुंचा । सामोस के पाइथागोरस, पाइथोगोरसीय दार्शनिक परम्परा के संस्थापक थे । उनका जन्म सामोस में 580 और 570 ई.पू. के बीच हुआ था । वह वर्ष 529 ई.पू. के आसपास दक्षिण इटली में यूनानी कोलोनी में चले गए थे । एम्ब्लीकस मानते थे कि पाइथागोरस दिव्य दर्शन शास्त्र के जनक और मार्ग दर्शक थे । वी. कापेरेली ने लिखा है कि ‘पाइथागोरस का दर्शन, ज्ञान के साथ प्रबल धार्मिक भावना का मिश्रण है’ । अनैक्सीमिनिज के दर्शन पर उनकी निर्भरता स्पष्ट । वे मानते हैं कि ब्रहमांड एक पवित्र वृत्त है, जिसके केन्द्र में दिव्य शाश्वत् अग्नि या न्यूमा है, जो केंन्द्र में स्पंदन कर रहा है और सभी चीजों को ब्रहमांडीय श्वांस से अनुप्राणित कर रहा है ।
नव-पाइथागोरियनों ने केन्द्रीय अग्नि की पहचान यूनानी जेयुस अथवा आदि देव ओलम्पस, केस्ल ऑफ जेयुस आदि से की है । अग्नि यहां एकता के कारक के रूप में है, जिससे हर वस्तु की उत्पति हुई है । उन्होंने ब्रहमांडविज्ञान, मानवविज्ञान और नैतिकशास्त्र पर अपना ध्यान केन्द्रित किया ।
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