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| एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि |
एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि
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अनैक्सागोरस का जन्म एशिया माइनर में क्लेजोमेनी में हुआ था । वे वहां से अपने घर परिवार के साथ एथेन्स आ गए और महान राजनेता पेरीकल्स के मित्र बन गए, जिनका लक्ष्य अपने शहर को हेल्लास का बौद्धिक और राजनीतिक केन्द्र बनाना था ।
एनेक्जागोरस 5 वीं शती ई० पू० एनेक्जागोरस सत् को नित्य अविकारी और उत्पत्ति-विनाश रहित मानने में पार्मेनाइडीज और एम्पेडोक्लीज से सहमत थे। उत्पत्ति को संयोग और विनाश को वियोग मानने में वे एम्पेडोक्लीज से सहमत थे किन्तु एनेक्जागोरस के अनुसार, एम्पेडोक्लीज के चार महाभूत मौलिक तत्त्व नहीं हैं, ये भी मौलिक तत्त्वों के संयोग से बने हैं। इनको एजेक्जागोरस ने बीज ( Seeds ) कहा है । ये 'बीज' अपने मौलिक रूप से विश्वभर में व्याप्त हैं । इनमें सहसा बैग से गति उत्पन्न हुई जिसके कारण समान 'बीज' परस्पर आकर्षित होकर एक-दूसरे से मिलते चले गए और इस प्रकार इस सृष्टि का निर्माण हुआ, किन्तु समस्या यह थी कि यह गति कैसे उत्पन्न हुई । इस समस्या का समाधान करने में एनेक्जागोरस को सहसा एक ऐसी सुन्दर कल्पना सूझी जिसके कारण ग्रीक दर्शन में अब तक उनको प्रतिष्ठित स्थान मिला हुआ है ।
एनेक्जेगोरस ने यह स्पष्ट स्वीकार किया कि गति जड़ बीजों में स्वतः उत्पन्न नहीं हो सकती । गति का कारण चेतन तत्त्व ही हो सकता है जो शक्तिमान है । इस युक्त तत्त्व को एनेक्जागोरस ने ‘परम विज्ञान' का नाम दिया । यह 'परम विज्ञान' समस्त विश्व का अधिष्ठाता है और बीजों में गति उत्पन्न करने का कारण है । यह विकासदर्शी है और समस्त जीवन का मूल स्रोत है । यह बीजों का भी 'बीज' है और विश्व में सामंजस्य और एकरूपता उत्पन्न करता है ।
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