थेल्स ( Thales ) का दर्शन थेल्स ( Thales ) का दर्शन थेल्स को अरस्तू एक सन्त कहकर पुकारते थे क्योंकि वे उस समय के महान सात सन्तो में से एक थे। अरस्तू ने थेल्स को दर्शनशास्त्र का आरम्भकर्ता माना है। थेल्स पहले आयोनी दार्शनिक थे जिन्होंने ब्रह्माण्ड के मूल तत्व के कारण के बारे में स्वयं को समर्पित किया था। थेल्स ने ब्रह्माण्ड का मूल तत्व जल को माना क्योंकि जल ठोस, द्रव और वाष्प तीनों रूपों में बदल सकता है। जल के कारण बीज का पोषण होता है जो कि जीवन के लिए अनिवार्य है। उनका मानना था कि पृथ्वी जल पर तैरने वाली एक सपाट डिस्क है। अतः जल सभी वस्तुओ का कारक है । थेल्स के दर्शन का आधार उसके तीन पूर्वानुमान थे- उनका मानना था कि ब्रह्माण्ड को मौलिक व्याख्या किसी एक आधारभूत तत्व से ही सम्भव है। ब्रह्माण्ड के रहस्य के पीछे दो सत्तायें नहीं हो सकती। प्रकृति का नियन्त्रण करने वाला तत्व एक ही होना चाहिए। यह एक मात्र सत् अवश्य ही कोई तत्व होना चाहिए। इस एक सत् को अवश्य ही निश्चित भी होना चाहिए। यह निश्चित तत्व जल है, जो प्रत्येक वस्तु में पाए जाने की क्षमता रखता है। एस एक तत्...