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Showing posts from October, 2021

थेल्स ( Thales ) का दर्शन

थेल्स ( Thales ) का दर्शन  थेल्स ( Thales ) का दर्शन      थेल्स को अरस्तू एक सन्त कहकर पुकारते थे क्योंकि वे उस समय के महान सात सन्तो में से एक थे। अरस्तू ने थेल्स को दर्शनशास्त्र का आरम्भकर्ता माना है। थेल्स पहले आयोनी दार्शनिक थे जिन्होंने ब्रह्माण्ड के मूल तत्व के कारण के बारे में स्वयं को समर्पित किया था। थेल्स ने ब्रह्माण्ड का मूल तत्व जल को माना क्योंकि जल ठोस, द्रव और वाष्प तीनों रूपों में बदल सकता है। जल के कारण बीज का पोषण होता है जो कि जीवन के लिए अनिवार्य है। उनका मानना था कि पृथ्वी जल पर तैरने वाली एक सपाट डिस्क है। अतः जल सभी वस्तुओ का कारक है । थेल्स के दर्शन का आधार उसके तीन पूर्वानुमान थे- उनका मानना था कि ब्रह्माण्ड को मौलिक व्याख्या किसी एक आधारभूत तत्व से ही सम्भव है। ब्रह्माण्ड के रहस्य के पीछे दो सत्तायें नहीं हो सकती। प्रकृति का नियन्त्रण करने वाला तत्व एक ही होना चाहिए। यह एक मात्र सत् अवश्य ही कोई तत्व होना चाहिए। इस एक सत् को अवश्य ही निश्चित भी होना चाहिए। यह निश्चित तत्व जल है, जो प्रत्येक वस्तु में पाए जाने की क्षमता रखता है। एस एक तत्...

थेल्स ( Thales ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

थेल्स ( Thales ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां थेल्स ( Thales ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां दार्शनिक जीवन – 624 ई० पू० से 548 ई० पू० प्रमुख दार्शनिक विचार – जल ब्रह्माण्ड का आर्क है। " Water is the arche". प्रमुख उपाधि – दर्शनशास्त्र का आरम्भकर्ता (अरस्तू ने यह उपाधि दी थी) प्रमुख कथन – “सभी वस्तुओं में ईश्वर है”    थेल्स को अरस्तू ने पश्चिमी दर्शनशास्त्र का जनक माना है। अरस्तू थेल्स के लिए सन्त शब्द का प्रयोग करते थे। थेल्स को पहले आयोनी दार्शनिक माना जाता है। इनका दर्शन 'मिलेटस' में फला-फूला। यह एशिया माइनर में एक यूनानी कालोनी थी जो अब वर्तमान में टर्की में स्थित है। थेल्स यूनान के ऐसे पहले दार्शनिक थे जिन्हें राजनेता, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री होने का गौरव प्राप्त था। थेल्स ने 28 मई 585 ई० पू० को होने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इन्होंने सर्वप्रथम अपनी परछाई का परिकलन कर मिश्र के एक पिरामिड की ऊंचाई ज्ञात की थी। थेल्स ने कुछ ज्यामितीय सिद्धान्त दिए थे जो इस प्रकार है - एक वृत अपन...