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Wednesday, May 11, 2022

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि 

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि 

दार्शनिक जीवन - 500 ई० पू० से 428 ई० पू०  

प्रमुख दार्शनिक विचार - " बुद्धि ( Nous ) सभी चीजों पर नियन्त्रण करता है"। Nous, or Mind ordering all things. 

प्रमुख उपाधि - नाउस की अवधारणा प्रस्तुत की 

प्रमुख कथन - "बुद्धि ( Nous ) अनन्त और स्वचालित है और इसमें कुछ भी मिश्रित नहीं, बल्कि यह स्वयंभू है"

           अनैक्सागोरस का जन्म एशिया माइनर में क्लेजोमेनी में हुआ था । वे वहां से अपने घर परिवार के साथ एथेन्स आ गए और महान राजनेता पेरीकल्स के मित्र बन गए, जिनका लक्ष्य अपने शहर को हेल्लास का बौद्धिक और राजनीतिक केन्द्र बनाना था । 

       एनेक्जागोरस 5 वीं शती ई० पू० एनेक्जागोरस सत् को नित्य अविकारी और उत्पत्ति-विनाश रहित मानने में पार्मेनाइडीज और एम्पेडोक्लीज से सहमत थे। उत्पत्ति को संयोग और विनाश को वियोग मानने में वे एम्पेडोक्लीज से सहमत थे किन्तु एनेक्जागोरस के अनुसार, एम्पेडोक्लीज के चार महाभूत मौलिक तत्त्व नहीं हैं, ये भी मौलिक तत्त्वों के संयोग से बने हैं। इनको एजेक्जागोरस ने बीज ( Seeds ) कहा है । ये 'बीज' अपने मौलिक रूप से विश्वभर में व्याप्त हैं । इनमें सहसा बैग से गति उत्पन्न हुई जिसके कारण समान 'बीज' परस्पर आकर्षित होकर एक-दूसरे से मिलते चले गए और इस प्रकार इस सृष्टि का निर्माण हुआ, किन्तु समस्या यह थी कि यह गति कैसे उत्पन्न हुई । इस समस्या का समाधान करने में एनेक्जागोरस को सहसा एक ऐसी सुन्दर कल्पना सूझी जिसके कारण ग्रीक दर्शन में अब तक उनको प्रतिष्ठित स्थान मिला हुआ है । 

         एनेक्जेगोरस ने यह स्पष्ट स्वीकार किया कि गति जड़ बीजों में स्वतः उत्पन्न नहीं हो सकती । गति का कारण चेतन तत्त्व ही हो सकता है जो शक्तिमान है । इस युक्त तत्त्व को एनेक्जागोरस ने ‘परम विज्ञान' का नाम दिया । यह 'परम विज्ञान' समस्त विश्व का अधिष्ठाता है और बीजों में गति उत्पन्न करने का कारण है । यह विकासदर्शी है और समस्त जीवन का मूल स्रोत है । यह बीजों का भी 'बीज' है और विश्व में सामंजस्य और एकरूपता उत्पन्न करता है ।

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Thursday, October 7, 2021

थेल्स ( Thales ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

थेल्स ( Thales ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

थेल्स ( Thales ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां

दार्शनिक जीवन – 624 ई० पू० से 548 ई० पू०

प्रमुख दार्शनिक विचार – जल ब्रह्माण्ड का आर्क है। "Water is the arche".

प्रमुख उपाधि – दर्शनशास्त्र का आरम्भकर्ता (अरस्तू ने यह उपाधि दी थी)

प्रमुख कथन – “सभी वस्तुओं में ईश्वर है”


   थेल्स को अरस्तू ने पश्चिमी दर्शनशास्त्र का जनक माना है। अरस्तू थेल्स के लिए सन्त शब्द का प्रयोग करते थे। थेल्स को पहले आयोनी दार्शनिक माना जाता है। इनका दर्शन 'मिलेटस' में फला-फूला। यह एशिया माइनर में एक यूनानी कालोनी थी जो अब वर्तमान में टर्की में स्थित है। थेल्स यूनान के ऐसे पहले दार्शनिक थे जिन्हें राजनेता, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री होने का गौरव प्राप्त था। थेल्स ने 28 मई 585 ई० पू० को होने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इन्होंने सर्वप्रथम अपनी परछाई का परिकलन कर मिश्र के एक पिरामिड की ऊंचाई ज्ञात की थी। थेल्स ने कुछ ज्यामितीय सिद्धान्त दिए थे जो इस प्रकार है -

  • एक वृत अपने व्यास द्वारा द्विभाजित रहता है।
  • किसी भी समद्विबाहु त्रिकोण के आधार के कोण बराबर होते है। 
  • यदि दो सीधी रेखाएं एक दूसरे को कटती हैं तो विपरीत कोण समान होते है। 
  • यदि दो त्रिकोणों में दो कोण और एक पार्श्व समान हो तो दोनों त्रिकोण एक समान होते हैं।   

अरस्तू ( Aristotle ) का दर्शन

अरस्तू ( Aristotle ) का दर्शन  अरस्तू ( Aristotle ) का दर्शन  तर्क शास्त्र           अरस्तू तर्क शास्त्र के क्षेत्र के वास्तविक अन्वेषक थे ।...