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एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) के दर्शन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न  1- एनेक्जागोरस के अनुसार सृष्टि का मूलतत्त्व है ? नाउस  फिलोस   1 और 2 दोनों  इनमें से कोई नहीं  2- एनेक्जागोरस के अनुसार सत् का स्वरूप है - नित्य और अविकारी   अनित्य और विकारी  नित्य और विकारी  अनित्य और अविकारी  3- एनेक्जागोरस द्वारा स्वीकार्य नाउस का स्वरूप है ? जड़  चेतन  1 और 2 दोनों  इनमें से कोई नहीं  4- एनेक्जागोरस के अनुसार 'नाउस' है ? परम विज्ञान  तर्कबुद्धि  विचार शक्ति  ये सभी   ---------------

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का दर्शन

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का दर्शन    एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का दर्शन            अनैक्सागोरस ने एम्पीडोकल्स की भांति पार्मेनाइड्स की पद्धति को अपनाते हुए यह माना कि " सत् स्थायी होता है" । इसका अर्थ है कि सत् से न तो सत् निकलता है और न ही असत्, बल्कि यह अपरिवर्तित रहता है । परन्तु अनैक्सागोरस एम्पीडोकल्स की इस दार्शनिक मान्यता से सहमत नहीं थे कि मूल तत्व अनेक हैं, जैसे - पृथ्वी, वायु, अग्नि और जल । उनके अनुसार, प्रत्येक विभाज्य वस्तु, जो गुणात्मक रूप से पूर्ण के समान हैं, वह परम और अव्युत्पन्न है । उदाहरण के लिए, चांदी के एक टुकड़े को दो भागों में बाट दिया जाये तो दूसरे टुकड़े में भी पहले टुकड़े के गुण होंगे । यहां भाग भी पूर्ण के समान होगा । वे वस्तुएं, जिनके भाग किए जाने पर उनके गुण भी वही होते हैं जो पूर्ण के होते हैं, परम और अव्युत्पन्न होते हैं । ये वस्तुएं अनेक गुणात्मक रूप से भिन्न कणों का मिश्रण होती हैं । अनैक्सागोरस के अनुसार कोई कण अकेला नहीं होता है बल्कि सभी प्रकार के कण एक साथ होते हैं और ये अविभाज्य होते हैं । लेकिन वास्तव में ...

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि

एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि  एनेक्जागोरस ( Anaxagoras ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धि  दार्शनिक जीवन - 500 ई० पू० से 428 ई० पू०   प्रमुख दार्शनिक विचार - " बुद्धि ( Nous ) सभी चीजों पर नियन्त्रण करता है"। Nous, or Mind ordering all things.  प्रमुख उपाधि - नाउस की अवधारणा प्रस्तुत की  प्रमुख कथन - " बुद्धि ( Nous ) अनन्त और स्वचालित है और इसमें कुछ भी मिश्रित नहीं, बल्कि यह स्वयंभू है"            अनैक्सागोरस का जन्म एशिया माइनर में क्लेजोमेनी में हुआ था । वे वहां से अपने घर परिवार के साथ एथेन्स आ गए और महान राजनेता पेरीकल्स के मित्र बन गए, जिनका लक्ष्य अपने शहर को हेल्लास का बौद्धिक और राजनीतिक केन्द्र बनाना था ।         एनेक्जागोरस 5 वीं शती ई० पू० एनेक्जागोरस सत् को नित्य अविकारी और उत्पत्ति-विनाश रहित मानने में पार्मेनाइडीज और एम्पेडोक्लीज से सहमत थे। उत्पत्ति को संयोग और विनाश को वियोग मानने में वे एम्पेडोक्लीज से सहमत थे क...