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हेराक्लाइटस ( Heraclitus ) का जीवन-परिचय एवं उपलब्धियां

 

हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) का जीवन-परिचय एवं उपलब्धियां 

हेराक्लाइटस  ( Heraclitus ) का जीवन-परिचय एवं उपलब्धियां 

दार्शनिक जीवन - 536 ई० पू० से - 470 ई० पू० 

प्रमुख दार्शनिक विचार - "सृष्टि का मूल तत्व अग्नि या तेजस्तत्व है"  

प्रमुख उपाधि - विपरीत सम्भूति का सिद्धान्त 

प्रमुख कथन - "मेरा दर्शन इने-गिने सुयोग्य व्यक्तियों के लिए ही है, क्योंकि गधों को घास चाहिए, स्वर्ण नहीं"


         हेराक्लाइटस का जन्म ईफेसस में हुआ था, वे एक संभ्रात परिवार के पुत्र थे और ईसा से पूर्व छठी शताब्दी के अन्त और पाँचवी शताब्दी के आरम्भ में पैदा हुए थे । इनका जन्म भगवान बुद्ध के अन्तिम दिनों में हुआ था । ये राजकुल में पैदा हुए और अपने छोटे भाई को उत्ताधिकारी घोषित कर विरक्त हो गए थे । इन्होंने प्रजातन्त्र का सदैव पूरजोर ढंग से विरोध किया । उनके लेखन के लगभग सौ अंश मौजूद हैं । इनमें अधिकतर ब्रहमाण्ड एवं आत्मा से सम्बंधित सूक्तियां और पहेलियां हैं । 

         हेराक्लाइटस क्षणभंगवादी थे । इनका मानना था कि संसार में कुछ भी नित्य नहीं, सब अनित्य और क्षणिक है । ये अग्नि को परम तत्व के रूप में स्वीकार करते थे और अग्नि को ही सब परिवर्तन का आधार मानते थे । ये कहते थे कि अग्नि और परिणाम दोनों एक है। agni में अखंड गति, निरन्तर परिवर्तन, अविच्छिन प्रवाह और अटूट धारा है और यही संसार का नियम है"। 

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