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| पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां |
पार्मेनाइड्स ( Parmenides ) का जीवन परिचय एवं उपलब्धियां
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दार्शनिक जीवन - 540 ई० पू० से 480 ई० पू० |
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प्रमुख दार्शनिक विचार - "तत्व सत् है परिणाम या गति नहीं" |
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प्रमुख उपाधि - यूरोपीय विज्ञान का संस्थापक |
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प्रमुख कथन - तत्व शुद्ध सत्ता (Pure Being) है । वह एक, अद्वितीय, नित्य, अपरिणामी, अविनाशी और कूटस्थ है । |
पार्मेनाइड्स यूनानी दर्शन के एलियाई परम्परा के दार्शनिक थे । उन्होंने ही 'सम्भवन' ( गति ) की अवधारणा के विरोध में 'सत्' ( स्थिति ) की अवधारणा को विकसित किया । इनका समय ईसा पूर्व पाँचवी शताब्दी रहा है । प्लेटों के अनुसार, जब एथेन्स में इनका वार्तालाप सॉक्रेटीज से हुआ तब इनकी अवस्था 65 वर्ष की थी । पार्मेनाइड्स ने एक कविता में अपनी दार्शनिक कृति लिखी है जिसमें ये स्वर्ग पहुँचते है और वहाँ एक देवी इनको सत्य का दर्शन करती है।
पार्मेनाइड्स का दर्शन हेरेक्लिाइटस के क्षणिकवाद के खण्डन से प्रारम्भ होता है और सत् को एक, अद्वितीय, नित्य, अपरिणामी, अविनाशी और कूटस्थ के रूप में स्थापित कर एक विशुद्ध विज्ञान के रूप में स्थापित करता है । इनका यह दर्शन "व्यवहार का मार्ग" (Way of Opinion) के नाम से भी जाना जाता है । इसलिए पार्मेनाइड्स को यूरोपीय विज्ञानवाद का संस्थापक भी माना जाता है ।
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